Monday, November 7, 2022

मुआवीनीन का शुक्रिया

 काबिले कद्र हजरात : 


अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातुहु ।


         *मकतब फैजाने असगर अली मिल्ली* का कयाम नई नस्ल की दीनी तालीम और तरबीयत के लिए किया गया था । *मकतब फैजाने असगर अली मिल्ली* से जुड़ा हुआ हर शख्स इसी मक़सद को हासिल करने में लगा हुआ है, चाहे वह मकतब का निजाम संभालने वाले हो , उस्ताद हो , या माली तआवुन करने वाले हजरात अल्लाह हम सब की कोशिशों को शरफे कुबुलीयत अता करें । आमीन 

लिहाजा तमाम तआवुन करने वाले हजरात ईस *हदीस ए पाक* को पढ़े और गौर व फिक्र की चादर ओढ़ ले ताकि आगे आने वाले तमाम मरहलों में राहत व सुकून और इत्मीनाने कलब नसीब हो यानी दिल का सुकून नसीब हो । 

 ** नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम ने इरशाद फरमाया आदमी के कदम कयामत के दिन अपने रब के सामने से उस वक्त तक नहीं हटेंगे जब तक के उससे पांच चीजों के बारे में सवाल न कर लिया जाए । 

नंबर 1 : जिंदगी कहां खपाई । 

नंबर 2 : जवानी किस काम में गवांई। 

 नंबर 3 : माल कहां से कमाया ।

 नंबर 4 : किस मसरफ में खर्च किया ।

 नंबर 5 : जो जाना उस पर क्या अमल किया ।

 इन 5 सवालों पर अगर गौर व फिक्र किया जाए तो मालूम होता है कि यह सवालात हमें तैयारी के लिए दिए गए हैं । और इम्तिहान से पहले ही सवालात बता देने के बाद भी अगर कोई फेल हो जाए तो उससे ज्यादा बदनसीब और बदकिस्मत कौन हो सकता है । 

इन्हीं सवालों की तैयारी की इब्तिदा मकतब में कराई जाती है, बुनियादी ईलमे दिन सिखा कर अल्लाह की मोहब्बत का बीज उसके दिल में लगा दिया जाता है । लिहाजा आज का यह मजमुन उन तमाम लोगों के लिए है जो किसी न किसी दिनी तहरीक का मुआविन व मददगार बने हुए है । खुसुसन मकतब फैजाने असगर अली मिल्ली के मुआवीनीन का हम तमाम जीम्मेदारान दिल की गहराई से शुक्रिया अदा करते हैं, कि उन्होंने अपने माली तआवुन के जरिए हमारे इस दिनी तहरीक को ताकत बख्शी जिसका अजर अल्लाह ताला अता करेंगे ।

मजीद एक गुजारिश यह भी है कि *मकतब फैजाने असगर अली मिल्ली* का तआवुन करने वाले हजरात में से कुछ तो बड़ी पाबंदी से बगैर मैसेज का इंतजार किए अदा कर देते हैं लेकिन कुछ हजरात वह भी है जिन्होंने एक या दो मर्तबा तआवुन किया उसके बाद से अब तक नहीं किया । लिहाजा *फैजाने असगर अली मिल्ली ग्रुप* के तमाम अहबाब से गुजारिश है कि मकतब का तआवुन हालात के मुताबिक करते रहे , इंशाअल्लाह यह हमारे लिए जखीर ए आखिरत होगा । 

अखिर में अल्लाह रब्बुल इज्जत से दुआ करते हैं कि अल्लाह तमाम मुआवीनीन हजरात के तआवुन को शरफे कुबुलीयत से नवाज कर दुनिया और आखिरत की भलाई नसीब फरमाए । आमीन


 फकत वस्सलाम 

 *ईदारा फैजाने असगर अली मिल्ली*

No comments:

Post a Comment