वाह रे इंसान तु कितना खुदगर्ज और मतलबी है के तुझको वक्त की कदर सिर्फ वही समझ में आती है जहां तेरा अपना मफाद होता है । जैसे अगर तू बीमार होता है और डॉक्टर का अप्वाइंटमेंट 12:00 का होता है तो तू 11:00 बजे से ही पहुंच जाता है ।
किसी बड़े सियासी नेता या मंत्री ने अगर तुझको बुलाया है तो तू उसके तय किए हुए वक्त से पहले ही पहुंच जाता है ।
अगर तू किसी कंपनी में जॉब करता है तो उस जॉब में प्रमोशन के लिए अपनी इज्जत बनाने के लिए वक्त से पहले पहुंच जाता है।
इन सब बातों को तु इसलिए समझता है क्योंकि इसमें फायदा नजर आ रहा है , इसमें तुझको यकीन है । क्या तुझको अल्लाह और उसके रसूल की बातों पर यकीन नहीं है ? क्या अल्लाह और उसके रसूल का मर्तबा तेरे नजदीक कुछ भी नहीं ? ( अल्लाह की पनाह)
अगर आपको अल्लाह और उसके रसूल की बातों पर यकीन है और अल्लाह और उसके रसूल को आप सबसे आला और बुलंद व सबसे बडा मानते हैं । तो फिर जुम्मा के दिन सबसे आखिर में क्यों आते हो ? क्या आपने अल्लाह के इस फरमान को नहीं सुना :
یٰۤاَیُّہَا الَّذِیۡنَ اٰمَنُوۡۤا اِذَا نُوۡدِیَ لِلصَّلٰوۃِ مِنۡ یَّوۡمِ الۡجُمُعَۃِ فَاسۡعَوۡا اِلٰی ذِکۡرِ اللّٰہِ وَ ذَرُوا الۡبَیۡعَ ؕ ذٰلِکُمۡ خَیۡرٌ لَّکُمۡ اِنۡ کُنۡتُمۡ تَعۡلَمُوۡنَ ﴿۹﴾
तर्जुमा : ए ईमान वालों जब जुम्मा के दिन नमाज के लिए अजान कहीं जाय तो तुम अल्लाह की याद (यानी नमाज व खुतबे ) की तरफ फौरन चल पड़ो और खरीदी व बीकरी छोड़ दो । यह बेहतर है तुम्हारे लिए तुम्हारे हक में अगर तुम को समझ है ।
और नबी ए पाक सल्लल्लाहू अलैही व सल्लम ने फरमाया : जिसने जुम्मा के दिन गुसले जनाबत कीया फिर जुम्मा के लिए गया तो गोया उसने एक ऊंट कुर्बान किया । ( यानी एक ऊंट कुर्बान करने के बराबर सवाब मिलेगा )
जो दूसरी घड़ी में गया तो गोया उसने एक दुंबा सिंग वाला कुर्बान किया । जो तीसरी घड़ी में गया तो गोया उसने मुर्गी दी । अल्लाह का कुरब हासिल करने के लिए ।
जो चौथी घड़ी में गया तो गोया उसने अंडा अल्लाह का कुरब हासिल करने के लिए दिया ।
और जब इमाम खुतबे के लिए खड़ा होता है तो खुतबे की तरफ ध्यान लगाते हैं । ( बुखारी वह मुस्लिम )
अब आप सोचिए कि अल्लाह और उसके रसूल हमसे क्या कहना चाह रहे हैं । अल्लाह और उसके रसूल चाहते है कि हर मुसलमान जुम्मा के दिन अपने तमाम कामों को पीछे रख कर सबसे पहले मस्जिद में पहुंचे । और दुनिया वालों को यह बता दें कि मेरे अल्लाह सबसे बड़े हैं और मेरे अल्लाह का हुक्म मेरे लिए सबसे अहम है और उसके रसूल सल्लल्लाहू अलैही व सल्लम ने जो कुछ फरमाया सच है ।
अजान के फौरन बाद सुन्नते पढ़कर अल्लाह और उसके रसूल की बात को सुने फिर खुतबा सुने फिर दो रकात फर्ज नमाज के साथ सुन्नते भी पढ़े ।
उसके बाद क्या करना है उसके बारे में अल्लाह ताला ने फरमाया :
فَاِذَا قُضِیَتِ الصَّلٰوۃُ فَانۡتَشِرُوۡا فِی الۡاَرۡضِ وَ ابۡتَغُوۡا مِنۡ فَضۡلِ اللّٰہِ وَ اذۡکُرُوا اللّٰہَ کَثِیۡرًا لَّعَلَّکُمۡ تُفۡلِحُوۡنَ ﴿۱۰﴾
तर्जुमा : जब नमाज मुकम्मल हो जाए तो फैल जाओ जमीन में और तलाश करो अल्लाह का फजल और अल्लाह को खूब याद करो ताकि तुम कामयाब हो जाओ ।
अगर हम अल्लाह और उसके रसूल के पैगाम को समझ गए तो हम दुनिया व आखिरत दोनों जहान में कामयाब हो जाएंगे ।
ऐ मुसलमानों याद रखो आज तुम लोगों के दरमियान चल फिर रहे हो कल नहीं होंगे जैसे तुम्हारे बहुत से आसपास रहने वाले लोग तुम्हारे आसपास नहीं हैं उन्हें महसूस करो और इस हकीकत को मान लो कि यह दुनिया खत्म होने वाली है । कोई हमेशा यहां रहने के लिए नहीं आया । मरने के बाद अल्लाह के सामने जाना है और हर बंदे का पांव उस वक्त तक अल्लाह के सामने से नहीं हीलेगा जब तक के वह जिंदगी के हर लमहे का हिसाब ना दे दे अल्लाह ताला हम सबको सोचने समझने की तौफीक अता फरमाए और उस पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए । आमीन
फकत वस्सलाम
मुफ़्ती नईमुज्जफर मिल्ली रहमानी
24 / 8 /2022
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