अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातुहु ।
मोहतरम व मुकर्रम हजरात ।
आज हमारे पास जो कुछ भी है वह सब अल्लाह ताला का दिया हुआ है । और अल्लाह की दी हुई चीजों को अल्लाह की मर्जी के मुताबिक ही खर्च करना है । ताकि अल्लाह हम से राजी हो और आखिरत में हमारे नजात का जरिया बन सके ।
एक मर्तबा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम ने सहाबा को माल खर्च करने का हुक्म दिया तो हजरत अबू बकर सिद्दीक रजि अल्लाह हु अन्हों ने 40000 दिरहम अल्लाह के रास्ते में खर्च किए जिनमें से 10000 दिरहम दिन में दिए 10000 दिरहम रात में दिए 10000 दिरहम लोगों के बीच में जाहिर कर के दिए और 10000 दिरहम खामोशी से दिए ।
अल्लाह ताला को यह अमल इतना पसंद आया कि अल्लाह ने उनके बारे में यह आयत नाजिल फरमाई और उसका आखिरत में इनाम क्या होगा उसको भी इस आयत में बयान फरमाया । वह आयत यह है ।
اَلَّذِیۡنَ یُنۡفِقُوۡنَ اَمۡوَالَهُمۡ بِالَّیۡلِ وَ النَّهَارِ سِرًّا وَّ عَلَانِیَةً فَلَهُمۡ اَجۡرُهُمۡ عِنۡدَ رَبِّهِمۡ ۚ وَ لَا خَوۡفٌ عَلَیۡهِمۡ وَ لَا هُمۡ یَحۡزَنُوۡنَ ﴿۲۷۴﴾ؔ
तर्जुमा तफसीर ए हक्कानी से :
जो लोग रात और दिन में छुपे और खुले में अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च किया करते हैं , तो उस का सवाब उनके रब के पास मौजूद हैं । ना उन पर कुछ खौफ (डर) होगा और ना वह कभी गमजदा होंगे ।
तो आप हजरात ने ऊपर पढा के सहाबा को अल्लाह के नबी सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम के हुक्म पर अमल करने का शौक और जज्बा कैसा था और अल्लाह की राह में खर्च करने का शौक और जज्बा कैसा था ।
मैं समझता हूं कि इसी जज्बे के साथ आप हमारे मकतब फैजाने असगर अली मिल्ली का तआवुन करते हैं । क्योंकि मकतब में अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम की तालीमात सिखाई जाती है । जो के अल्लाह का रास्ता है । और इसमें आप अपना माल लगाते हैं ।
लिहाजा हम अल्लाह ताला से दुआ करते हैं कि अल्लाह ताला आपके माल लगाने को कुबूल फरमाए और आयत के अंदर जो इनामात बयान फरमाए हैं , अल्लाह वह इनाम आप और हम सबको अता फरमाएं , अल्लाह कयामत के और दुनिया के खौफ से ग़म से नजात अता फरमाए ।
फकत वस्सलाम
मुफ़्ती नईमुज्जफर मिल्ली रहमानी
24 / 8 /2022
ماشاء اللہ
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