Thursday, August 25, 2022

जुम्मा का दिन और इंसान की खुदगर्जी

 वाह रे इंसान तु कितना खुदगर्ज और मतलबी है के तुझको वक्त की कदर सिर्फ वही समझ में आती है जहां तेरा अपना मफाद होता है । जैसे अगर तू बीमार होता है और डॉक्टर का अप्वाइंटमेंट 12:00 का होता है तो तू 11:00 बजे से ही पहुंच जाता है । 

किसी बड़े सियासी नेता या मंत्री ने अगर तुझको बुलाया है तो तू उसके तय किए हुए वक्त से पहले ही पहुंच जाता है ।

 अगर तू किसी कंपनी में जॉब करता है तो उस जॉब में प्रमोशन के लिए अपनी इज्जत बनाने के लिए वक्त से पहले पहुंच जाता है। 

इन सब बातों को तु इसलिए समझता है क्योंकि इसमें फायदा नजर आ रहा है , इसमें तुझको यकीन है । क्या तुझको अल्लाह और उसके रसूल की बातों पर यकीन नहीं है ? क्या अल्लाह और उसके रसूल का मर्तबा तेरे नजदीक कुछ भी नहीं ?  ( अल्लाह की पनाह)

अगर आपको अल्लाह और उसके रसूल की बातों पर यकीन है और अल्लाह और उसके रसूल को आप सबसे आला और बुलंद व सबसे बडा मानते हैं । तो फिर जुम्मा के दिन सबसे आखिर में क्यों आते हो ? क्या आपने अल्लाह के इस फरमान को नहीं सुना : 


یٰۤاَیُّہَا الَّذِیۡنَ اٰمَنُوۡۤا اِذَا نُوۡدِیَ لِلصَّلٰوۃِ مِنۡ یَّوۡمِ الۡجُمُعَۃِ فَاسۡعَوۡا اِلٰی ذِکۡرِ اللّٰہِ وَ ذَرُوا الۡبَیۡعَ ؕ ذٰلِکُمۡ خَیۡرٌ لَّکُمۡ اِنۡ کُنۡتُمۡ تَعۡلَمُوۡنَ ﴿۹﴾

तर्जुमा : ए ईमान वालों जब जुम्मा के दिन नमाज के लिए अजान कहीं जाय तो तुम अल्लाह की याद (यानी नमाज व खुतबे ) की तरफ फौरन चल पड़ो और खरीदी व बीकरी छोड़ दो । यह बेहतर है तुम्हारे लिए तुम्हारे हक में अगर तुम को समझ है । 


और नबी ए पाक सल्लल्लाहू अलैही व सल्लम ने फरमाया : जिसने जुम्मा के दिन गुसले जनाबत कीया फिर जुम्मा के लिए गया तो गोया उसने एक ऊंट कुर्बान किया । ( यानी एक ऊंट कुर्बान करने के बराबर सवाब मिलेगा ) 

जो दूसरी घड़ी में गया तो गोया उसने एक दुंबा सिंग वाला कुर्बान किया । जो तीसरी घड़ी में गया तो गोया उसने मुर्गी दी । अल्लाह का कुरब हासिल करने के लिए ।

  जो चौथी घड़ी में गया तो गोया उसने अंडा अल्लाह का कुरब हासिल करने के लिए दिया । 

 और जब इमाम खुतबे के लिए खड़ा होता है तो खुतबे की तरफ ध्यान लगाते हैं । ( बुखारी वह मुस्लिम ) 


अब आप सोचिए कि अल्लाह और उसके रसूल हमसे क्या कहना चाह रहे हैं । अल्लाह और उसके रसूल चाहते  है कि हर मुसलमान जुम्मा के दिन अपने तमाम कामों को पीछे रख कर सबसे पहले मस्जिद में पहुंचे । और दुनिया वालों को यह बता दें कि मेरे अल्लाह सबसे बड़े हैं और मेरे अल्लाह का हुक्म मेरे लिए सबसे अहम है और उसके रसूल सल्लल्लाहू अलैही व सल्लम ने जो कुछ फरमाया सच है ।  

अजान के फौरन बाद सुन्नते पढ़कर अल्लाह और उसके रसूल की बात को सुने फिर खुतबा सुने फिर दो रकात फर्ज नमाज के साथ सुन्नते भी पढ़े । 

उसके बाद क्या करना है उसके बारे में अल्लाह ताला ने फरमाया :


فَاِذَا قُضِیَتِ الصَّلٰوۃُ فَانۡتَشِرُوۡا فِی الۡاَرۡضِ وَ ابۡتَغُوۡا مِنۡ فَضۡلِ اللّٰہِ وَ اذۡکُرُوا اللّٰہَ کَثِیۡرًا لَّعَلَّکُمۡ تُفۡلِحُوۡنَ ﴿۱۰﴾


तर्जुमा : जब नमाज मुकम्मल हो जाए तो फैल जाओ जमीन में और तलाश करो अल्लाह का फजल और अल्लाह को खूब याद करो ताकि तुम कामयाब हो जाओ । 

अगर हम अल्लाह और उसके रसूल के पैगाम को समझ गए तो हम दुनिया व आखिरत दोनों जहान में कामयाब हो जाएंगे । 

ऐ मुसलमानों याद रखो आज तुम लोगों के दरमियान चल फिर रहे हो कल नहीं होंगे जैसे तुम्हारे बहुत से आसपास रहने वाले लोग तुम्हारे आसपास नहीं हैं उन्हें महसूस करो और इस हकीकत को मान लो कि यह दुनिया खत्म होने वाली है । कोई हमेशा यहां रहने के लिए नहीं आया । मरने के बाद अल्लाह के सामने जाना है और हर बंदे का पांव उस वक्त तक अल्लाह के सामने से नहीं हीलेगा जब तक के वह जिंदगी के हर लमहे का हिसाब ना दे दे अल्लाह ताला हम सबको सोचने समझने की तौफीक अता फरमाए और उस पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए । आमीन 

 फकत वस्सलाम 

मुफ़्ती नईमुज्जफर मिल्ली रहमानी 

   24 / 8 /2022

Wednesday, August 24, 2022

अल्लाह के रास्ते मे खर्च की अहमियत

 अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातुहु ।


         मोहतरम व मुकर्रम हजरात । 

आज हमारे पास जो कुछ भी है वह सब अल्लाह ताला का दिया हुआ है । और अल्लाह की दी हुई चीजों को अल्लाह की मर्जी के मुताबिक ही खर्च करना है । ताकि अल्लाह हम से राजी हो और आखिरत में हमारे नजात का जरिया बन सके । 

एक मर्तबा रसूलुल्लाह सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम ने सहाबा को माल खर्च करने का हुक्म दिया तो हजरत अबू बकर सिद्दीक रजि अल्लाह हु अन्हों ने 40000 दिरहम अल्लाह के रास्ते में खर्च किए जिनमें से 10000 दिरहम दिन में दिए 10000 दिरहम रात में दिए 10000 दिरहम लोगों के बीच में जाहिर कर के दिए और 10000 दिरहम खामोशी से दिए । 

अल्लाह ताला को यह अमल इतना पसंद आया कि अल्लाह ने उनके बारे में यह आयत नाजिल फरमाई और उसका आखिरत में इनाम क्या होगा उसको भी इस आयत में बयान फरमाया । वह आयत यह है ।


اَلَّذِیۡنَ یُنۡفِقُوۡنَ اَمۡوَالَهُمۡ بِالَّیۡلِ وَ النَّهَارِ سِرًّا وَّ عَلَانِیَةً فَلَهُمۡ اَجۡرُهُمۡ عِنۡدَ رَبِّهِمۡ ۚ وَ لَا خَوۡفٌ عَلَیۡهِمۡ وَ لَا هُمۡ یَحۡزَنُوۡنَ ﴿۲۷۴﴾ؔ


तर्जुमा तफसीर ए हक्कानी से  : 

जो लोग रात और दिन में छुपे और खुले में अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च किया करते हैं , तो उस का सवाब उनके रब के पास मौजूद हैं । ना उन पर कुछ खौफ (डर) होगा और ना वह कभी गमजदा होंगे । 


       तो आप हजरात ने ऊपर पढा के सहाबा को अल्लाह के नबी सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम के हुक्म पर अमल करने का शौक और जज्बा कैसा था और अल्लाह की राह में खर्च करने का शौक और जज्बा कैसा था । 

      मैं समझता हूं कि इसी जज्बे के साथ आप हमारे मकतब फैजाने असगर अली मिल्ली का तआवुन करते हैं । क्योंकि मकतब में अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम की तालीमात सिखाई जाती है । जो के अल्लाह का रास्ता है । और इसमें आप अपना माल लगाते हैं । 

लिहाजा हम अल्लाह ताला से दुआ करते हैं कि अल्लाह ताला आपके माल लगाने को कुबूल फरमाए और आयत के अंदर जो इनामात बयान फरमाए हैं , अल्लाह वह इनाम आप और हम सबको अता फरमाएं , अल्लाह कयामत के और दुनिया के खौफ से ग़म से नजात अता फरमाए । 


फकत वस्सलाम 

मुफ़्ती नईमुज्जफर मिल्ली रहमानी

24 / 8 /2022

Saturday, August 13, 2022

मकतब की अहमियत

 मकतब की अहमियत के लिए मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा दुनिया में जुल्म और जरायम क रोकने के लिए कानून बनाए गए हैं और पुलिस का निजाम बनाया गया है।
 लेकिन उसके बावजूद भी  ना जुल्म ना जरायम कम हो रहे है । 
दुनिया में बस एक ही चीज है जो दुनिया से बुराई को खत्म कर सकती है और वह है अल्लाह से डरना जोके मकतब मदारिस मसाजिद से पैदा होता है। 
मुफ़्ती नईमुज्जफर मिल्ली रहमानी 
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اسا تذہ کی اہمیت



اساتذہ دنیا کے سب سے بہترین لوگ ہوتے ہیں۔ جو کندہ ناتراش کو تراش کر اعلی مقام پر منتقل کرتے ہیں۔ ان کا ڈانٹنا اور مارنا بدترین و شکستہ زندگی کے لیے سمّ قاتل کا کام کرتی ہے۔ اور والدین و قوم کیلئے سربلندی کا باعث بنتی ہے۔ اسی لئے کہتے ہیں دنیا کے تمام اساتذہ اگر اپنے کام میں مخلص ہوں تو دنیا سے جہالت کا خاتمہ ہو جائے۔ 
لہذا اساتذہ کا احترام کیا جائے ۔ اور طلبہ کے والدین کو چاہئے کہ وہ بھی اپنے بچوں کو ٹیچرز و اساتذہ کا ادب و احترام سکھائیں۔ تاکہ ہمارے بچوں کا مستقبل روشن ہو ۔
 فقط والسلام
 مفتی محمد نعیم الظفر
ملی رحمانی شرڈی