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लेखक : मुफ्ती नईमुजफ्फर मिल्ली रहमानी
4 /11/2023 ____
दौरे हाजिर में नवजवानाने इस्लाम के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि यहूद व नसारा कौन है। उनके अकाएद क्या है उनमें और हम में फर्क क्या है वगैरा-वगैरा ।
यहूदियों को बनी इसराइल भी कहते हैं और इसराइल इब्रानी जबान का लफ्ज़ है हजरत याकूब अलैहीस्सलाम की तरफ निस्बत करते हुए उन्हें बनी इसराइल कहा जाता है । हजरत मूसा अलैहीस्सलाम के आने से पहले यहूदी तीन तरह की इबादत करते थे ।
१) खानदानी देवताओं की इबादत ।
२) पत्थरों की इबादत ।
३) कौमी देवताओं यानी बादशाहों की इबादत ।
मूसा अलैस्सलाम पर जो मुकद्दस किताब नाजिल हुई थी वह तवरात थी और आपकी क़ौम तवरात के तालीमात को भूल चुकी थी । और आज तवरात का हाल यह है कि वह अपनी असल हालत पर बाकी नहीं है उसकी कई वजह है जिनमें से चंद आपके सामने पेश करते हैं ।
१) वह खुंरेज जंगे जो यहूदियों को लड़ना पड़ी ।
२) कुतुबे मुकद्दसा की जबानों का तब्दील होना ।
३) लीखने और तरतीब देने वालों का ना मालुम होना।
४) तौरात को तरतीब देने वाले के पास जांच का मेअयार नहीं था ।
५) इब्रानी रसमुलखत की तब्दीली ।
६) हजरत इस्माइल और उनकी औलाद के बारे में तवरात में जो तारीफी जुमले थे उसको बदलकर तहकीर आमेज ( बुरे) जुमले शामिल कर दिए जो तहरीफ की एक बद्तरीन मिसाल है ।
*यहूदियों का खुदा से मुताल्लिक अकीदा :*
१) खुदा आसमान से देखा है वह तमाम लोगों पर निगाह रखे हुए हैं और उसका तखत आसमान पर मौजूद है ।
२) तौहीद के खिलाफ एक बगावत करने वाला अकीदा अल्लाह के बेटे का अकीदा।
३) फरिश्तों के बारे में अकीदा: फरिश्ते इंसान से अफजल है , और फरिश्ते खुदा के मुकद्दस बेटे हैं जबुर में फरिश्तों को लश्कर ए खुदावंदी और किताबे पैदाइश में मुशीराने ख़ुदा करार दिया है ।
**नबियों से मुतालिक यहूदियों का अकीदा।**
अहद नामा अतीक जो के तौरात ही का एक हिस्सा है उसका गहराई से मुताला किया जाए तो मालूम होगा कि उन्होंने नबियों को दरज ए इंसानियत से भी ज्यादा नीचे कर दिया है ।
जैसे अहद नामा अतीक में अल्लाह की कुश्ती का मंजर दिखाया गया है और यह राग अलापा गया है कि एक मर्तबा खुदा ने रात भर हजरत याकूब से कुश्ती लड़ी और दोनों में पेच बराबर रहा ।
इसी तरह नुह अलैहीस्सलाम के बारे में नाजेबा कलमात लिखे कि आप नशा अवर मशरूब पीते यानी शराब पीते और बरहना हो जाते थे ।
हजरत दाऊद अलैहीस्सलाम पर इल्जाम लगाते के ओरिया की बीवी से इश्क लड़ाते थे ।
इसी तरह कुफ्र , शीरक, झूठ , चोरी , धोखेबाजी ,शहवत परस्ती , बुत परस्ती , जैसे इल्जामात लगाए ।
इसी तरह बहुत सारे इल्जामात हैं जो बेहूदगी और नापाकी पर मबनि है ।
*अकीद ए आखीरत*
अकीद ए आखिरत में शुरूआत में तमाम मजाहीब के साथ थे मगर दौरेहाजीर में वो उसे भूला चुके हैं ।
ए काश ! मुसलमान उनके बारे में मुताला करते पढ़ते समझते फिर उनसे ईख्तेलाफ रखते मगर आज की सूरते हाल बड़ी अफसोस नाक है कि हम भी यहुदियों के गुण गाए जा रहे हैं इस्लामी तहजीब व तमद्दून छोड़कर यहूदियों के तहजीब व तमद्दून को ईख्तियार कर रहे हैं ।
आज इजराइल फिलिस्तीन पर जुल्म के पहाड़ तोड़ रहा है तो दूसरी तरफ ह्यूमन राइट की रट लगा रहा है । उनका तो अजल ही से ये तरीका रहा है की कामयाबी हासिल करनी है तो धोखाधड़ी, बद अहदी, जुल्म और ज्यादती , इल्जाम तराशी और झूठ फैलाने के जराए जदीद मीडिया को अपना हथियार बनाओं।
मगर इन तमाम चीजों को एक दिन जवाल है कागज की यह नाव ज्यादा दूर नहीं जाने की । मजलूमों की आहे आसमान पर जाएगी अल्लाह की पकड़ आएगी । अल्लाह के दिने हक का गलबा होगा ।*
(तकाबुले अदयान, रद्दे ईसाईयत)
मीन जानिब :
इदारा फैजाने असगर अली मिल्ली